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100% टैरिफ वाले बिल पर ट्रंप ने किया साइन, जानें अब आगे क्या? भारत-चीन पर कैसे पड़ेगा असर

 Written By: Amar Deep
 Published : Sep 19, 2026 06:50 am IST,  Updated : Sep 19, 2026 07:10 am IST

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून' (Sanctioning Russia and Iran Act) पर हस्ताक्षर किए। इस कानून का इस्तेमाल रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों, जैसे चीन और भारत पर भारी शुल्क लगाने के तौर पर किया जा सकता है।

'रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून' पर ट्रंप ने किया साइन।- India TV Hindi
'रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून' पर ट्रंप ने किया साइन। Image Source : AP

भारत और चीन जैसे देशों के लिए एक मुसीबत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून' (Sanctioning Russia and Iran Act) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कानून का मकसद मॉस्को और उससे बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों, जैसे चीन और भारत पर भारी शुल्क लगाना है। व्हाइट हाउस ने कहा, "शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति ने कानून के तौर पर H.R. 5334, यानी 'लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून, 2026' पर हस्ताक्षर किए। 

यह कानून रूस पर कानूनी प्रतिबंधों, टैरिफ और रोक लगाने और उन्हें बढ़ाने के साथ-साथ ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाता है।" हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को 'रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून' पास किया। इस कानून का मकसद रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ मॉस्को के रक्षा उद्योग और उसके तथाकथित 'शैडो फ्लीट' (गुप्त बेड़े) में शामिल सहयोगियों पर भी प्रतिबंध लगाना है।

भारत-चीन पर कैसे पड़ेगा असर?

दरअसल, यह कानून राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं। इन देशों में चीन और भारत भी शामिल हैं। ऐसे में इस कानून का इस्तेमाल भारत और चीन के खिलाफ किया जा सकता है। यह कानून ट्रंप को इसे लागू करने के मामले में व्यापक अधिकार देता है, जैसे कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाए, टैरिफ की दरें क्या हों, और क्या प्रतिबंधों के प्रावधानों में छूट दी जाए।

कब लागू हो सकता है टैरिफ?

यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर लागू हो जाएगा। इसके तहत, उन देशों से आयातित सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाना जरूरी है, जो कानून बनने से पहले के 12 महीनों में कुल मात्रा के हिसाब से रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदार रहे हों। अगर किसी देश का रूसी गैस आयात, लागू अवधि के दौरान रूस के कुल निर्यात का 15 प्रतिशत से कम रहा हो और उसने उस आयात को कम करने के लिए "महत्वपूर्ण कदम" उठाए हों, तो उसे गैस से जुड़े शुल्कों से छूट मिलती है।

बता दें कि यह कानून रूस के "शैडो फ्लीट" और रूसी ऊर्जा उत्पादन या प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले अन्य विदेशी लोगों को निशाना बनाता है। इनमें जहाज के मालिक, ऑपरेटर, मैनेजर, बीमाकर्ता और संबंधित गतिविधियों में शामिल अन्य पक्ष शामिल हैं।

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